आज के टाइम में दुनिया ग्लोअबल विलेज बन रहा हैं, तो अंग्रेजी का महत्व क्या हैं, क्या इसको अंग्रेजी का Colonization कह के नकार देना चाहिए या हमें अपने बच्चो को इसको पढ़ना चाहिए, तो सबसे पहले हमें कुछ Fact समझना होगा,
- अंग्रेजी दुनिया की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली मातृभाषा है।
- 2025 तक अनुमानित 2 बिलियन लोग अंग्रेजी बोलने वाले होंगे।
- विश्व के लगभग 35% इंटरनेट कंटेंट अंग्रेजी में उपलब्ध है।
- भारत में अंग्रेजी का उपयोग करीब 10% लोग अपनी मातृभाषा के रूप में करते
एक बार एक businessman था। उसका बेटा English medium school में पढ़ता था। एक बार उसके पुराने दोस्त ने उसे टोका: “अरे, अंग्रेजी क्यों पढ़ा रहे हो? अपनी भाषा छोड़ोगे क्या?”
उस businessman ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया: “नहीं। लेकिन मेरे बच्चे को दुनिया से बात करनी है। हिंदी में सोचेगा, English में बोलेगा।”
यही वो tension है जो हर Indian family में है। हर माँ-बाप के मन में है। हर student के मन में है।
अंग्रेजी सीखें या नहीं — इस सवाल का कोई simple जवाब नहीं है। लेकिन एक honest जवाब ज़रूर है।
आज दोनों sides को fairly सुनेंगे — और फिर कुछ ऐसे facts देखेंगे जो बहस को एक नई जगह ले जाते हैं।

अब हम दो तरीके से इसके बारे में समझेंगे, पहला ऐसे लोगों का prespective समझेंगे जो अंग्रेजी के का विरोध करते हैं और कहते है कि हमें अपनी मातृभाषा में ही अपने बच्चो को पढ़ना चाहिए और दूसरा ऐसे लोगों का भी, Prespective समझेंगे जो अंग्रेजी को Next Big Thing बताते हैं और कहते हैं, हमें समय के हिसाब से चलना चाहिए |
Table of Contents
बहस शुरू करने से पहले — ground reality:
| Fact | Data |
| दुनिया में English बोलने वाले | लगभग 1.5 बिलियन लोग (second language सहित) |
| Internet content जो English में है | लगभग 55% |
| India में English speakers | लगभग 10-12 करोड़ (fluent) |
| India में officially recognized languages | 22 (Eighth Schedule) |
| India में total languages/dialects | 19,500+ (2011 Census) |
| Hindi speakers (first + second language) | लगभग 57% Indians |
तो अंग्रेजी के विरोध करने वाले –
तो उनका कहना हैं, ऐसे देश विशेषकर, जिनमें बहुत सारी भाषाएं बोली जाती हैं, उनका कहना है कि कोई भी बच्चा जल्दी अगर कुछ सीखता हैं, तो वो अपनी मातृभाषा में ही सीखता हैं, वे बड़े-बड़े वैज्ञानिको का उदहारण देते हैं, उनका कहना कि सबने, आइन्स्टीन से लेकर के, कोई बड़ा साहित्यकार, लियो टॉलस्टॉय, सबने अपनी मातृभाषा में ही काम किया हैं, उन्होंने अपना बेस्ट वर्क, उनको अंग्रेजी नहीं आती है और और आप जो हैं,कुछ नया सोच सकते हैं , वो अपनी मातृभाषा में ही, इसलिए अपनी भाषा का महत्व बहुत बढ़ जाता हैं, और दूसरा वो चिंता जताते हैं कि अंग्रेजी के ज्यादा इस्तेमाल करने से, हमारी जो अपनी भाषा हैं, वो ख़त्म हो जायेगी और हमारें अपनी भाषा, 5000 तो कोई-कोई कहता हैं कि 10 हज़ार साल से भी ज्यादा पुरानी हैं, तो इसकी चिंता भी वो जताते हैं ,
और एक जो सबसे बड़ी वो कहते है कि यह अंग्रेजी की भाषा हैं, तो हमें गुलामी से मुक्त होना हैं, हम अब अपनी भाषा में सीखेंगे और अंग्रेजो की ग़ुलामी क्यूँ करें
अंग्रेजी के समर्थन करने वाले –
तो जो अंग्रेजी का समर्थन करता है उनका कहना हैं कि आज के टाइम में रिसर्च की भाषा, English हैं, Technology की भाषा अंग्रेजी हैं, कोई भी नया चीज़ सीखना हो, आप चाहे उत्तर प्रदेश -बिहार से आते हो, हिंदी माध्यम से पढाई की हो, सरकारी नौकरी चाहते हो, 8th Pay Commission का इंतज़ार कर रहे हो, आप के लिए अंग्रेजी ज़रूरी हो ही जाता हैं, और दूसरी बड़ी बात, इन्टरनेट पर पर सब कुछ अंग्रेजी में है और उसके बाद में वो कहते हैं, अंग्रेजी एक चाभी हैं, मतलब इन्टरनेट पर ज्ञान का भण्डार हैं, फ्री में, लेकिन इस ज्ञान के भण्डार अगर सब तक पहुंचे, इसके लिए उनको अंग्रेजी आना ज़रूरी हैं, तो गरीब-से-गरीब बच्चा तक, फ्री में सब कुछ सीखें, इसके लिए अंग्रेजी जानना ज़रूरी हो जाता हैं, यह नया रोज़गार का अवसर देती हैं, इसके सीखने से आप Technology चलने में माहिर होते हैं, और दुनिया में लगभग, सारे देश अंग्रेजी बोल लेते हैं, मतलब वहां कुछ-न-कुछ वर्ग अंग्रेजी बोलने वाला होगा ही, तो यह लगभग अघोषित International Langauge हैं, तो यह आपको बाहरी दुनिया से परिचित होने का मौका देती हैं, इसलिए भी अंग्रेजी ज़रूरी हो जाता हैं | इसलिए हमें ज़रूर अंग्रेजी सीखना चाहिए, इसके ऊपर मैंने एक आर्टिकल लिखा हैं,
जिसमें मैंने Daily Conversational English Sentences for daily Use आप उसको भी पढ़ सकते हैं, और देख के सीख सकते हैं|
अंग्रेजी और भारत का असली रिश्ता — वो 6 Facts जो बहस बंद कर देते हैं
Fact #1 — Same Degree, अलग Salary — सिर्फ English की वजह से
India में यह हर दिन होता है — दो लोग एक ही college से, एक ही degree लेकर निकलते हैं। एक English confident है, एक नहीं।
| Profile | Salary (Entry Level) |
|---|---|
| B.Tech — Hindi medium, English weak | ₹2.5 – ₹3.5 LPA |
| B.Tech — Same college, English confident | ₹5 – ₹8 LPA |
| Same skills. Same degree. Same city. | Difference: Only English |
यह discrimination सही है या गलत — वो अलग बहस है। लेकिन यह reality है जो हर Indian family को पता होनी चाहिए।
Fact #2 — वो 5 Indian States जहाँ English ना आने की सबसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है
| State | Reality |
|---|---|
| Bihar / UP | Government jobs के लिए Hindi काफी है — लेकिन private sector और migration के लिए English ज़रूरी |
| Maharashtra | Mumbai में English के बिना corporate jobs लगभग impossible |
| Tamil Nadu | अपनी भाषा पर गर्व सबसे ज़्यादा — फिर भी IT capital Chennai में English mandatory |
| West Bengal | Kolkata में Bengali culture strong — लेकिन Infosys, TCS में English के बिना promotion नहीं |
| Kerala | Highest literacy in India — और highest English penetration भी — coincidence नहीं |
Pattern: जिन states में English education stronger है — वहाँ Gulf और abroad migration भी ज़्यादा है — remittance भी ज़्यादा है।
Fact #3 — Einstein और Tolstoy वाला argument — और उसका सच्चा जवाब
अंग्रेजी विरोधी हमेशा कहते हैं — “Einstein को अंग्रेजी नहीं आती थी, फिर भी वो genius थे।”
यह argument सुनने में अच्छा लगता है। लेकिन इसमें एक बड़ा hole है:
| Einstein का ज़माना | आपका ज़माना |
|---|---|
| Research papers postal mail से share होते थे | Research papers internet पर milliseconds में |
| Network = physically जो लोग मिले | Network = LinkedIn, GitHub, global collaboration |
| Job market = local या national | Job market = global remote work |
| Knowledge access = library तक limited | Knowledge access = YouTube, Coursera, free forever |
Einstein के ज़माने में internet नहीं था। आज का genius वो है जो दुनिया के किसी भी researcher के साथ collaborate कर सके — और उसके लिए English चाहिए।
Fact #4 — भाषा मरती नहीं — लेकिन neglect से ज़रूर कमज़ोर होती है
अंग्रेजी विरोधी का सबसे emotional argument है — “हमारी भाषा ख़त्म हो जाएगी।”
Reality check:
| भाषा | Status 2026 |
|---|---|
| Hindi | 600 million+ speakers — कहीं नहीं जा रही |
| Tamil | 2000+ साल पुरानी — strongest regional identity in India |
| Bengali | Rabindranath की भाषा — Nobel Prize winner की भाषा मरेगी नहीं |
| Sanskrit | यह ज़रूर endangered है — लेकिन English की वजह से नहीं, neglect की वजह से |
असली खतरा English नहीं है। असली खतरा यह है कि हम अपने बच्चों को Hindi या Tamil की great literature नहीं पढ़ाते। Premchand पढ़ाओ — Hindi नहीं मरेगी। Thirukkural पढ़ाओ — Tamil नहीं मरेगी।
Fact #5 — वो Indian जिन्होंने English को weapon की तरह use किया — बिना अपनी जड़ें छोड़े
यह section internet पर exist नहीं करता — real Indian examples with real impact:
| Person | Background | English का use |
|---|---|---|
| Dr. B.R. Ambedkar | Dalit family, extreme poverty | English को weapon बनाया — Columbia और LSE से पढ़े — Constitution लिखा |
| A.P.J. Abdul Kalam | Tamil Muslim, Rameswaram का छोटा शहर | English में communicate किया — लेकिन Tamil में सोचते थे |
| Sundar Pichai | IIT Kharagpur — Hindi/Tamil background | English fluency ने Google CEO तक पहुँचाया |
| Kalpana Chawla | Haryana का छोटा शहर, Hindi medium | English सीखी — NASA तक पहुँची |
Common thread: इन सबने English को अपनी identity replace करने के लिए नहीं — दुनिया तक पहुँचने के tool की तरह use किया।
Fact #6 — “Bilingual होना Boon है, Burden नहीं” — Science क्या कहती है
यह section आपकी पूरी बहस को एक line में settle करता है:
Research says — bilingual brain:
- Memory और problem-solving में stronger होता है
- Alzheimer’s देरी से आता है bilingual लोगों में
- Empathy ज़्यादा होती है — क्योंकि दो cultures की thinking होती है
| Myth | Reality |
|---|---|
| “दो भाषाएं सीखने से बच्चा confused होगा” | दो भाषाएं सीखने से brain और sharp होता है |
| “Hindi छूट जाएगी अगर English सीखी” | Switzerland में 4 languages — कोई नहीं छूटी |
| “English सीखना मतलब अंग्रेजों की नकल” | Tool को adopt करना colonization नहीं होता |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
क्या English सीखना ज़रूरी है?
आज की reality में — हाँ, highly recommended है। Research papers, technology, global job market, internet knowledge — सब English में है। लेकिन “ज़रूरी” का मतलब यह नहीं कि अपनी मातृभाषा छोड़ो। दोनों साथ चल सकती हैं।
क्या English सीखने से हमारी भाषाएँ मरेंगी?
नहीं — अगर हम उन्हें use करते रहें। Kerala में English penetration सबसे ज़्यादा है, फिर भी Malayalam strongest regional languages में है। भाषाएँ neglect से मरती हैं, दूसरी भाषा सीखने से नहीं।
क्या Einstein और Tolstoy की तरह बिना English के भी successful हो सकते हैं?
Einstein और Tolstoy के ज़माने में internet नहीं था। आज global collaboration, remote work, और digital knowledge — सब English में है। Context बिल्कुल बदल गया है।
English सीखो — लेकिन इसलिए नहीं कि “यह अंग्रेजों की भाषा है और आगे बढ़ना है तो इसे अपनाना पड़ेगा।”
English सीखो इसलिए — क्योंकि यह दुनिया की एक window है। और जितनी ज़्यादा windows, उतना बड़ा नज़ारा।
अपनी Hindi में सोचो। अपनी मातृभाषा में गाओ। अपने literature पर गर्व करो।
और English में दुनिया से बात करो।